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भारत में आर्यो का प्रवेश

     कक्षा 6 की सरकारी किताब में लिखा भी गया है। की आर्य विदेशी है और भारत मे घुसपैठिये है। मुगल चले गये, अंग्रेज चले गए लेकिन सबसे पहले आर्यो ने भारत मे घुसपैठ की परन्तु वो नही गये।        इस पुस्तक के पन्ने में लिखा है कि आर्य भ्रमण के लिए घोड़ो का प्रयोग करते थे। आज जिन दलितों को घोड़ी पर बैठने का विरोध होता है। ये विरोध उन आर्यो व उन घोड़ो से मेल खाता है।।       आर्य अभी तक गये नही भारत से  आर्यो की पहचान ये है।  संविधान का विरोधी आर्य है। आरक्षण का विरोधी आर्य है। लोकतंत्र का विरोधी आर्य है। SC/ST/OBC/MIN के अधिकारों का विरोधी आर्य है।     और ये आर्य कोई और नहिं हिन्दू धर्म के ठेकेदार ही हैं।      कुछ लोग तर्क करने के बजाय गाली गलौज करेंगे। <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-5460100888476302"      crossorigin="anonymous"></script> जय भीम जय भारत नमोः बुद्धाय

पुराणों मे भगवान बुद्ध का ब्राह्मणीकरण | बुध्द जी को ब्राह्मणों ने कैसे भगवान बताया

 ●पुराणों मे भगवान बुद्ध का ब्राह्मणीकरण●      नमो बुद्धाय शुद्धाय (स्कंदपुराण, अवन्ती, 42/14)   मत्स्यः कूर्मों वराहश्च नरसिंहोअ्थ वामनः । रामो रामश्च कृष्णश्च बुद्धः कल्कि श्च ते दश।।   अर्थात --,मत्स्य, कूर्म, वराह,नरसिंह, वामन, राम (परशुराम),राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्की, -ये दश अवतार है ।भगवान बुद्ध नौवा अवतार है । (क) नमः कृष्णाय बुद्धाय नमो मलेच्छप्रणाशिने                  (भूमि 18/66) (ख) प्रलम्बहन्त्रे शितिवाससे नमो, नमोअ्स्तू बुद्धाय च दैत्यमोहिने ।। (सृष्टि 73/92) (प्रलय के विनाशक बलराम को नमस्कार,  दैत्यों को मोहने वाले बुद्ध को नमस्कार हो ) दैत्यानां नाशनार्थाय विष्णुना बुद्धरूपिणा।                              (,उत्तर, 263/69-70) नमोअ्स्तुहयरूपाय त्रिविक्रम नमोअ्स्तु ते । नमोअ्स्तु बुद्धरूपाय रामरूपाय कल्किने ।।                              (ब्रह्मपु...

7 नवंबर | विश्व विधार्थी दिवस | world student day

 आज 7 नवंबर है, आज ही के दिन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने पहली कक्षा में दाखिला लिया था  किसको पता था कि उस वक़्त का नन्हा सा बालक एक झटके में 5000 सालो के राजतंत्र को लोकतंत्र में बदल देगा.. इसलिए इस दिन को "विश्व विधार्थी दिवस" के नाम से जाना जाता है        विद्यार्थि दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं। #world_students_day  <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-5460100888476302"      crossorigin="anonymous"></script> जय भीम जय भारत नमोः बुद्धाय बी.एल. बौद्ध

हर हर महादेव, मे महादेव एक बौद्ध भिखु थे जो बौद्ध मार्ग को नार्थ इंडिया से साउथ इंडिया मे ले गए | महादेव | हर हर महादेव

 हर हर महादेव, मे महादेव एक बौद्ध भिखु थे जो बौद्ध मार्ग को नार्थ इंडिया से साउथ इंडिया मे ले गए सम्राट असोक के समय मे, फिर साउथ इंडिया से महादेव थेर के अनुयायी बढ़ने लगे, संघ बढ़ा तो हर हर महादेव भी प्रचलित हुआ, फिर 9th सेंचुरी मे केरल से शैव मार्ग उभरा, जिसे प्रच्छन्न बौद्ध भी कहा गया. लोग अब भी हर हर महादेव कर रहे है बस महादेव का मतलब शिव समझा दिया धूर्त ने। पर सच्चाई कब तक छुपती?  सीरीलंका के दीप वंश परम्परा के लेखनी की आखिरी किताब कही जाने वाली शासन वंश ने पोल खोल ही दी। Reference : शासन वंश (बुद्ध धम्म का इतिहास)  न जय भीम जय भारत नमोः बुद्धाय बी.एल. बौद्ध

मनु_स्मृति_का_काला_सच! | मनुस्मृति

 #मनु_स्मृति_का_काला_सच! ⚫”यज्ञ के समय नारी, कुत्ते व शूद्र को नहीं देखना  चाहिए । : ऐतरेय ब्राह्मण (3/24/27) “ ⚫ वही नारी उत्तम है जो पुत्र को जन्म दे। (35/5/2/47)  ⚫पत्नी एक से अधिक पति ग्रहण नहीं कर सकती, लेकिन पति चाहे कितनी भी पत्नियां रखे।  :आपस्तंब (1/10/51/52) बोधयान धर्म सूत्र (2/4/6) शतपथ ब्राह्मण (5/2/3/14)  ⚫ जो नारी अपुत्रा है, उसे त्याग देना चाहिए। : तैत्तिरीय संहिता (6/6/4/3)  ⚫पत्नी आजादी की हकदार नहीं है।  : शतपथ ब्राह्मण (9/6) ⚫ केवल सुन्दर पत्नी ही अपने पति का प्रेम पाने की अधिकारिणी है।  :बृहदारण्यक उपनिषद् (6/4/7) ⚫ यदि पत्नी सम्भोग के लिए तैयार न हो तो उसे खुश करने का प्रयास करो। यदि फिर भी न माने तो उसे मार -पीट कर वश में करो।  : मैत्रायणी संहिता (3/8/3) ⚫ नारी अशुभ है। यज्ञ के समय नारी, कुत्ते व शूद्र को नहीं देखना चाहिए। अर्थात् नारी और शूद्र कुत्ते के समान हैं। (1/10/11) ⚫ नारी तो एक पात्र (बरतन) समान है। महाभारत (12/40/1)  ⚫ नारी से बढ़कर अशुभ कुछ नहीं है। इनके प्रति मन में कोई ममता नहीं होनी चाहिए। (6/33/32) ⚫...

कार्तिक पूर्णिमा का बुद्ध-धम्म में महत्व |

 कार्तिक-पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा का बुद्ध-धम्म में महत्व 18-19 नवम्बर 2021 कार्तिक पूर्णिमा है! कार्तिक पूर्णिमा के परम पुनीत अवसर पर सभी देशवासियों को -    हार्दिक मँगल मैत्री ,      सब का मँगल हो,      सब की स्वस्ति-मुक्ति हो।     1) लोकगुरु शाक्यमुनि तथागत भगवान गोतम बुद्ध द्वारा , संघ के प्रथम 60 अर्हत भिक्खुओं को लोक मे सद्धम्म की संस्थापना व कल्याण हेतु चारों दिशाओं में जाकर धम्म प्रचार का निम्वनवत शब्दों में अनुशासन दिया था—            चरथ, भिक्खवे, चारिकं -      बहुजनहिताय      बहुजनसुखाय       लोकानुकंपाय,      अत्थाय हिताय सुखाय देवमनुस्सानं।        देसेथ, भिक्खवे, धम्मं -      आदिकल्याणं,       मज़्झेकल्याण,    परियोसानकल्याणं ,     सात्थं-सव्यंजनं,                             केवलं,प...

सिंधुघाटी सभ्यता के सृजनकर्ता शूद्र और वणिक

 सिंधुघाटी सभ्यता के सृजनकर्ता शूद्र और वणिक... सन 1882 में विश्व प्रसिद्ध इतिहासकार सर मैक्समूलर ' ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अपने भाषण में कहा था कि -हम इतिहास क्यों पढ़ते हैं ? केवल यह जानने के लिए कि हमारे पूर्वज कौन थे ? यानी वे भौतिक रूप से कौन थे ? कैसे थे.?.वे क्या सोचते थे ? क्या करते थे ? उनके धार्मिक आचार -विचार और विश्वास क्या थे ? मैक्समूलर महोदय की इतिहास की इस परिभाषा को ध्यान में रखते हुए हम यह कह सकते हैं कि भारत के प्राचीन काल पर लिखा इतिहास आर्य क्षत्रिय तथा ब्राह्मणों का इतिहास बनाकर लिखा गया है,उसके बाद का राजपूतों का इतिहास भी उच्च वर्ग का इतिहास ही कहा जा सकता है,तदुपरांत मुस्लि म सम्राटों ,नवाबों का और अन्त में अंग्रेज लार्डो का इतिहास लिखा गया,मगर इस देश के मूल आदिवासी शूद्र तथा वणिकों का , जिनकी जनसंख्या देश की कुल जनसंख्या का 85 प्रतिशत है का इतिहास कभी लिखा ही नहीं गया इस प्रकार यह पुस्तक शूद्रों ( वणिक ) की उत्पत्ति व इतिहास पर लिखी गई प्रथम विश्व विशुद्ध रचना कही जा सकती है.    सन् 1856 ई .में मुल्तान - लाहौर रेलवे लाइन के 100 मील के हिस्...