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संत गाडगे बाबा का जीवन परिचय | संत गाडगे बाबा की जयंती कब मनाई जाती हैं | गाडगे बाबा समाज सुधारक

              संत गाडगे बाबा...                       देवीदास डेबुजी झिंगराजि जानोरकर ( Sant Gadge Baba ) जन्म :- 23 फरवरी, 1876 जन्मस्थान :- अँजनगाँव सुरजी, जिला. अमरावती,महाराष्ट्र. पिता :- झिंगराजि माता :-सखुबाई डेबुजी झिंगराजि जानोरकर साधारणतः संत गाडगे महाराज और गाडगे बाबा के नाम से जाने जाते थे, वे एक समाज सुधारक और घुमक्कड भिक्षुक थे जो महाराष्ट्र में सामाजिक विकास करने हेतु साप्ताहिक उत्सव का आयोजन करते थे. उन्होंने उस समय भारतीय ग्रामीण भागो का काफी सुधार किया और आज भी उनके कार्यो से कई राजनैतिक दल और सामाजिक संस्थान प्रेरणा ले रहे है. उनका वास्तविक नाम देवीदास डेबुजी था. महाराज का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अँजनगाँव सुरजी तालुका के शेड्गाओ ग्राम में एक धोबी परिवार में हुआ था. वे एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे, वे पैरो में फटी हुई चप्पल और सिर पर मिट्टी का कटोरा ढककर पैदल ही यात्रा किया करते थे. और यही उनकी पहचान थी. जब वे किसी गाँव में प्रवेश करते थे तो वे तुरंत ही गटर और रास्तो...

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महान सम्राट अशोक जी का जीवन परिचय

 ।सम्राट अशोक ने सिर्फ 84,000 स्तूप चैत्य ही नही बनाया, उन्होंने 50,00,000 लाख स्क्वायर किलोमीटर भारत का क्षेत्रफल भी बनाया ! ईसा पूर्व बौद्ध सभ्यता में अशोक शासनकाल में भारत का क्षेत्रफल 50,00,000 लाख स्क्वायर किलोमीटर था ! ईसा पूर्व भारत में 5,000 B.C से बौद्ध सभ्यता थी. कोई भी भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता था ! सिकंदर आया लेकिन बौद्ध सम्राट नंद से डर कर भाग गया. सम्राट अशोक के दौर में भारत पर हमला करना तो छोड़ो, विदेशी राजाओं को यह डर सताए रहता था कहीं सम्राट अशोक उनके साम्राज्य पर आक्रमण ना कर दें ! सेंट्रल एशिया पूरा गंधारा, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, कश्मीर, नेपाल सारा भारत का अभिंग अंग था. ईसा बाद सनातन संस्कृति का उदय हुआ, पुष्यमित्र शुंग नाम के ब्राह्मण ने तख्ता पलट कर शासक बन गया तब से भारत की सीमा कमजोर हो गई ! आज भी ब्राह्मण राज में भारत की सीमा कमजोर है. ब्रिटिश राज ने INDIA को 32,87,263 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्रफल सौंप कर गए थे ! 1947 में बना PAKISTAN ने INDIA पर आक्रमण कर गिलगिट बल्टिस्तान - आधा कश्मीर का 86,268 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्रफल इलाका कब्ज़ा कर लिया ! 1...

भारत के सबसे प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय कौन-कौनसे हैं || भारत के 2200 साल पुराने विश्वविद्यालय कहां कहां थे

 2200 साल पुराना जम्बूदीप (भारत) में बौद्ध विश्वविद्यालय। 1) नालंदा बौद्ध विश्वविद्यालय (बिहार) 2) तक्षशिला विश्वविद्यालय (पाकिस्तान)  3) गुंसिला महिला बौद्ध विश्वविद्यालय (बिहार) 4) पुष्पागिरी बौद्ध विश्वविद्यालय (उड़ीसा) 5) कांचीपुरम बौद्ध विश्वविद्यालय (तमिलनाडु) 6) काशी बौद्ध विश्वविद्यालय (काशी)  7) वल्लभी बौद्ध विश्वविद्यालय (गुजरात) 8.) विक्रमशिला बौद्ध विश्वविद्यालय (बिहार) 9) समयेश बौद्ध विश्वविद्यालय (भोट, तिब्बत में मौजूद)   10) जगदला बौद्ध विश्वविद्यालय (बांग्लादेश) 11) सोमपुरा बौद्ध विश्वविद्यालय (बांग्लादेश) 12) ओदंतपुरी बौद्ध विश्वविद्यालय (बिहार) 13) मदुरै बौद्ध विश्वविद्यालय (तमिलनाडु)  14) उज्जेन बौद्ध विश्वविद्यालय (मध्य प्रदेश) 15) नागार्जुनकोंडा बौद्ध विश्वविद्यालय (आंध्र प्रदेश) 16) पंडिता चैत्य बौद्ध विश्वविद्यालय (बांग्लादेश)  17) नवदीप बौद्ध विश्वविद्यालय (पश्चिम बंगाल) 18) तवांग बौद्ध विश्वविद्यालय (अरुणाचल प्रदेश) -     दुनियां जब पड़ लिखा सुरू कर रही थी तब (भारत यानी जम्बूदीप) में 18 विश्व विद्यालय थे  बी.एल. बौद्ध...

महर्षि बालीनाथ जयंती कब मनाई जाती है || महर्षि बालीनाथ का जीवन परिचय || बैरवा दिवस कब मनाया जाता है

31 दिसम्बर को महर्षि बालीनाथ जयन्ती...    बैरवा सन्तशिरोमणि महाऋषि बालीनाथ जी महाराज...      जन्म स्थान- ग्राम - मण्डावरी, तहसील-लालसोट, जिला- दौसा (राजस्थान) जन्म तिथि- 9 मार्च फाल्गुतन सुदी सप्तमी सन 1926 (सन 1869)    नामकरण- नन्दराम...     पिता-माता- श्री किशनाराम जी बैरवा (बैण्डवाल गौत्र) एंव श्रीमती सुन्दरबाई मध्यमवर्गाीय किसान परिवार प्रांरभिक जीवन-...    गाँव में पाठशाला के अभाव में अध्ययन नहीं कर सकें, किन्तु आदर्श जीवन के लिए जिस सच्चित्रता की आवश्यकता थी वह बचपन से ही प्राप्त कर रहे थे।    विवाह-...    किशनाराम जी की पहली सन्तान होने के कारण मात्र 10 वर्ष की आयु में सगाई एवं बंशीपाडा (गंगापुर सिटी) की बैरवा कन्या चम्पाबाई से सन 1882 में 13 वर्ष की आयु में विवाह।     जीवन गाथा-...      विवाहोपरान्त राजस्थान में फेली महामारी में माता श्रीमती सुन्दरबाई का देहान्त तथा एक वर्ष बाद ही पिताजी का देहान्त। घर की खेती बाडी का सारा भार नाजुक कन्धों पर आ गया। किन्तु उनका ध्यान किसी दिव्य स्...

भारत में प्रथम बालिका विद्यालय कब व कहां खोला गया था

 भारत में प्रथम बालिका विद्यालय : 1 जनवरी 1848  1जनवरी 1848 के दिन ही जोतिबा फुले, सावित्री बाई और फातिमा शेख ने भारत के अंदर बेटियों और महिलाओं को शिक्षित करने के लिए पहली पाठशाला तात्याभाई भिड़े बाड़ा, बुधवारपेठ पुणे, महाराष्ट्र में खोली थी।      इस स्कूल में छह छात्राओं ने दाखिला लिया जिनकी आयु चार से छह के बीच थी। इनके नाम अन्नपूर्णा जोशी, सुमती मोकाशी, दुर्गा देशमुख, माधवी थत्ते, सोनू पवार और जानी करडिले थे। इन छह छात्राओं की कक्षा के बाद सावित्री के घर घर जाकर अपनी बच्चियों को पढाने का आह्वान करने का फल यह निकला कि पहले स्कूल में ही इतनी छात्राएं हो गई कि एक और अध्यापक नियुक्त करने की नौबत आ गई । ऐसे समय विष्णुपंत थत्ते ने मानवता के नाते मुफ्त में पढाना स्वीकार कर विद्यालय की प्रगति में अपना योगदान दिया।    लोगों की गालियाँ, बदतमीजी, बहिष्कार, सामाजिक प्रताड़ना को सहकर भारत की इस प्रथम शिक्षिका ने इस महादेश में बहुस्तरीय अमानवीय परम्पराओं और असमानता के विरुद्ध शिक्षा की अलख जगाकर जो कार्य किया है, वह इतिहास में विलक्षण और सर्वाधिक महान कार्यों में स...

राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में गौतम बुद्ध की एक प्रतिमा है यह प्रतिमा 1500साल पुरानी है

 क्या आपने कभी सोचा है... राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में गौतम बुद्ध की एक प्रतिमा है यह प्रतिमा 1500साल पुरानी है , (यह प्रतिमा 5सदी गुप्त काल की है )और इस हॉल में शपथ-ग्रहण समारोह आयोजित किये जाते है राष्ट्रपति द्वार कराए जाने वाले शपथ-ग्रहण समारोह में ,यह प्रतिमा पृष्टपट की तरह होती है भारत देश के कई गणमान्य हस्तियों ने बुद्ध की इस प्रतिमा के सामने भारत और भारत के सविधान के प्रति वफादार रहने की कसम खाई है राष्ट्रपति भवन का निर्माण कार्य साल 1913 में शुरू हुआ था और इसे बनने में 17 साल लगे। इसको बनाने के लिए लगभग 23,000 मजदूरों को काम पर लगाया गया था। 23,000 मजदूरों में से 6,000 हजार मजदूर सिर्फ पत्थर तरासने का काम करते थे। राष्ट्रपति भवन का डिज़ाइन या आर्किटेक्ट को लूटियंस ने तैयार किया था। इसलिए हम दिल्ली को लूटियंस दिल्ली के नाम से भी जानते हैं। लूटियंस के बारे में कहा जाता है कि उसका चश्मा गोल था। इसलिए वह गोलाकार डिजाइन ज्यादा बनाता था। ▪ राष्ट्रपति भवन में गौतम बुद्ध की मूर्ति लगाई गई है। यह बुद्ध की मूर्ति बेवजह नही बल्कि काफी सोच समझकर और गहन मंथन कर लगाई गई है। राष्ट्रपति ...