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संविधान की उद्देशिका | संविधान | भारत का संविधान

 "  "संविधान की उद्देशिका

हमारे संविधान की उद्देशिका में बहुत ही भव्य और महान शब्दों का प्रयोग हुआ है,' हम भारत के लोग ' ,भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न ( WE , THE PEOPLE OF INDIA having solemnly resolved to constitute India into a SOVEREIGN ) 

1 - समाजवादी ( SOCIALIST ) : उत्पादन तथा वितरण के साधन पूर्णतया या अंशतया राज्य के स्वामित्व अथवा नियंत्रण में होने चाहिए,

2 - धर्मनिरपेक्ष ( SECULAR ) : वह राज्य जो धर्म की व्यक्तिगत तथा समवेत स्वतंत्रता प्रदान करता है, संवैधानिक रूप से किसी धर्म विशेष से जुड़ा हुआ नहीं है,और जो धर्म का न तो प्रचार करता है तथा न ही उसमें हस्तक्षेप करता है.

3 - लोकतंत्रात्मक गणराज्य ( DEMOCRATIC REPUBLIC ) : ऐसा राज्य जिसमें चुने हुए अध्यक्ष तथा जनप्रतिनिधियों की सरकार होती है,जिसमें जनता सर्वोच्च होती है तथा कोई विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग नहीं होता है.

4 - न्याय ( JUSTICE ) : न्याय में सामाजिक ,आर्थिक और राजनीतिक न्याय शामिल है, संविधान की उद्देशिका में न्याय को स्वतंत्रता ,समानता और बंधुता के सिद्धांतों से ऊंचा स्थान दिया गया है.

5 - स्वतंत्रता ( LIBERTY ) : स्वतंत्रता का अर्थ " विचार , अभिव्यक्ति ,विश्वास ,धर्म और उपासना की स्वतंत्रता " के अधिकार की सकारात्मक अवधारणा से है .

6 - प्रतिष्ठा और अवसर की समता ( EQUALITY of status and opportunity ) : इस समानता में कानूनी ,सामाजिक , राजनीतिक और आर्थिक पहलू शामिल हैं.

7 - व्यक्ति की गरिमा ( Dignity of the individual ) : व्यक्ति की गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए संविधान के अनुच्छेद 17 के द्वारा अस्पृश्यता के आचरण का अंत किया गया तथा अनुच्छेद 32 के द्वारा यह उपबंध ( Provision ) किया गया कि कोई भी व्यक्ति अपने मूल अधिकारों के प्रवर्तन ( लागू कराने ) तथा अपनी व्यक्तिगत गरिमा के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय में न्याय की गुहार लगा सकता है.

8 -राष्ट्र की एकता तथा अखंडता ( Unity and integrity of the Nation ) : अनुच्छेद 51 ( a ) के अनुसार सभी नागरिकों का यह कर्तव्य बना दिया गया है कि वे भारत की संप्रभुता ,एकता और अखंडता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें.

9 - बंधुता ( FRATERNITY ) : बंधुता का अर्थ भाईचारे की सर्वमान्य भावना को बढ़ावा देने से है,इसमें जातीय ,भाषायी , धार्मिक और अन्य अनेक प्रकार की विविधताएं आड़े न आयें, यह सिद्धान्त सामाजिक जीवन को एकता तथा अखण्डता प्रदान करता है.

अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 को एतद्वारा इस संविधान को अंगीकृत ,अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं,( IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this twenty - sixth day of November , 1949 ,do HEREBY ADOPT , ENACT AND GIVE TO OURSELVES THIS CONSTITUTION )

         



जय भीम नमो: बुध्दाय  


बी.एल. बौद्ध




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