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कहीं बुद्ध पुत्र राहुल तो हनुमान नहीं ?

 #बुद्ध_पुत्र_राहुल एक महान धम्म धम्म प्रचारक थे। वे अपने करुणामय स्वभाव और त्यागी वृत्ति से अर्हंत पद पर पोहच गए। संघ के अनुशासन की जिम्मेवारी आदरणीय भंते राहुल पर थी। भिखखु संघ में सम्मलित होने वाले श्रमनेरो को प्रशिक्षित करने की मुख्य जिम्मवारी भंते राहुल की थी।


महायानी बुद्धिज़्म के अनुसार, जापान में #sonja सोंजा याने, #अर्हत_पद तक पोहचे हुवे भंते। #sonja यह #संत शब्द से मिलता जुलता शब्द है


जापान में 16 अर्हत songa को पूजनीय मानते है, उसमेसे ही एक  #Ragora_Sonja (रेगोरा सोंग्ज़ा) एक है। यह Ragora Sonja यह कोई और नहीं बल्कि, बुद्ध पुत्र राहुल है।


जापानी वर्णमाला में ला के बदले रा यह वर्ण है।

ब्राह्मणी साहित्य यह बुद्धोत्तर साहित्य है इसमें कोई संदेह नही, रामायण के सारे पात्र यह बुद्ध जातक और बुद्ध इतिहास से प्रेरित है। हनुमान यह भी एक ऐसा ही character है।


हनुमान की मूर्ति जिसके सीने में राम की प्रतिमा होती है,  मूर्ति बुद्ध पुत्र भंते राहुल की मूर्ति की नकल है।


इतना ही नही, हनुमान चालीसा भी बुद्ध के जयमंगल अठ्ठ गाथा से चुराई गई है या फिर उससेही प्रेरित है।

जपान में भंते राहुल(Ragora Songa) की मूर्ति और हनुमान की मूर्ति देख कर आप खुद अनुमान लगावो।

Ragora Sonja यानि राहुल ।


झेन बुद्धिज़्म के अनुसार यह मूर्ति राजकुमार सुकिती गोतम यानि भगवान गोतम बुद्ध के पुत्र राहुल की है, जो कालांतर में बुद्ध का अनुयायी बना और अरहत पद को प्राप्त हुआ।


राहुल की यह मूर्ति अपना सीना चीरकर उसमें बस रहे बुद्ध को दिखा रही हैं। जिसका झेन बुद्धिज़्म के अनुसार प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि हर किसी मे बुद्धत्व प्राप्ति की पात्रता और क्षमता होती हैं। 


जापानी भाषा में राहुल को Ragora Sonja कहा जाता हैं।


बाकी समझदार को इशारा काफी है।









ब्राह्मणी साहित्य और सारे किरदार बुद्धिज़्म से नकल किये गए है। बुद्धिज़्म से चुराए गए हैं।



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