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हैंडलूम मशीन

हैंडलूम मशीन को कपड़ों बनाने के लिए प्रेम नुमा मशीन का इस्तेमाल होता है जिसमें यह पता चलता है कि टेक्सटाइल में कपड़ा बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है जिसमें जैसे साड़ी चद्दर , towel bed sheet shirting etc. 

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 क्रांतिकारी जय भीम  सिंधु घाटी की सभ्यता से यह  बात साबित होती है कि  सिंधु घाटी की सभ्यता पुरुष प्रधान सत्ता नहीं थी    सिंधु घाटी की सभ्यता स्त्री प्रधान सत्ता थी स्त्री ही घर की प्रमुख हुआ करती थी मुझे यह बताने की जरूरत नहीं  स्त्री प्रधान  सत्ता के कारण सिंधु घाटी की सभ्यता एक उन्नत सभ्यता थी  आर्यों के भारत पर कब्जा करने  के साथ ही   भारत का परिदृश्य बदल गया  भारत  अचानक पुरुष प्रधान देश बन गया स्त्री दमन सोशण का पर्याय बन गई   जो स्त्री कल तक घर की  प्रधान हुआ करती थी उसकी तक़दीर में पति के साथ सती होना लिख दिया गया  कल तक जिस स्त्री के फैसले परिवार के लिए  मान्य होते थे  उसे स्त्री के तकदीर में देवदासी होना लिख दिया गया बिना उसकी  मर्जी के लोग उसका फैसला करने लगे  सिंधु घाटी की उन्नत सभ्यता यह बताने के लिए काफी है कि स्त्रियों का   बौद्धिक स्तर  कितना ऊंचा और कितना बेहतर रहा होगा   स्त्रियों को दिमाग से विकलांग बनाने के लिए और उनका बौद्धिक स्तर नीचे ग...

सूबेदार मेजर रामजी सकपाल का परिनिर्वाण दिवस 2 फरवरी 1913 को हुआ | भीमराव अंबेडकर जी के पिताजी राम जी सतपाल का जीवन इतिहास

सुबेदार  मेजर रामजी सकपाल परिनिर्वाण दिवस :2 फरवरी.. (14.11.1843--2.2.1913)   2.2.1951 डॉ.अंबेडकर जी के भतीजे मुकुंदराव आनंदराव अंबेडकर जी का देहांत।     डॉ. भीमराव अम्बेडकर का पैतृक गाँव अम्बावाड़े महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के छोटे शहर से पाँच मील दूरी पर है । उनके दादा मालोजी सकपाल ईस्ट इंडिया कंपनी के बम्बई सेना के हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे । उनका कहना था कि युद्ध में बहादुरी के एवज में उन्हें कुछ भूमि आवंटित की गई है । कहा जाता है कि मालोजी सकपाल की दो संताने रामजी (पुत्र) और मीरा बाई (पुत्री) थी ।     रामजी सकपाल का जन्म 14 नवम्बर 1843 को हुआ था ।    अपने पिता की तरह रामजी भी सेना में शामिल हो गये, उनके रेजि   रामजी सकपाल का जन्म 14 नवम्बर 1843 को हुआ था ।    अपने पिता की तरह रामजी भी सेना में शामिल हो गये, उनके रेजिमेंट के सूबेदार मेजर धर्मा मुखाडकर थे जो महार जाति के थे । मेजर धर्मा महाराष्ट्र के पाडे जिले के मुखाड गांव के निवासी थे । उनका परिवार क्षेत्र का सम्मानित परिवार था और उनके सभी सातो भाई ब्रिटिश सेना मे...

सम्मान के लिए बौद्ध धर्म परिवर्तन करें --

 सम्मान के लिए धर्म परिवर्तन करें ----- "डा.बी.आर.अम्बेडकर" सांसारिक उन्नति के लिए धर्म परिवर्तन चाहिए मैंने निश्चय कर लिया है कि मैं धर्म परिवर्तन अवश्य करूंगा, सांसारिक लाभ के लिए धर्म परिवर्तन नहीं करूंगा आध्यात्मिक भावना के अलावा और कोई मेरा ध्येय नहीं है,हिन्दू धर्म के सिद्धांत मुझे अच्छे नहीं लगते ये बुद्धि पर आधारित नहीं हैं,मेरे स्वाभिमान के विरुद्ध हैं आपके लिए आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों दृष्टिकोण से धर्म परिवर्तन बहुत जरूरी है, कुछ लोग सांसारिक लाभ के लिए धर्म परिवर्तन करने की कल्पना का उपहास करते हैं,मरने के बाद आत्मा का क्या होगा इसे कौन जानता है ? वर्तमान जीवन में जो सम्मानपूर्वक जीवन नहीं बिता सकता उसका जीवन निरर्थक है आत्मा की बातें करने वाले ढ़ोंगी हैं,धूर्त हैं, हिन्दू धर्म में रहने के कारण जिनका सब कुछ बर्बाद हो चुका हो ,जो अन्न और वस्त्र के लिए मोहताज बन गए हों,जिनकी मानवता नष्ट हो चुकी है ऐसे लोग सांसारिक लाभ के लिए विचार न करें तो क्या वे आकाश की ओर टकटकी लगाए देखते रहेंगे या अगले जन्म में सुखी होने का स्वप्न देखते रहेंगे,पैदाइशी अमीरीपन और मुफ्तखोरीपन ...